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साहित्यिक पत्रिका शब्द गुंजन के अगस्त अंक में प्रकाशित ग़ज़ल
दि अंडरलाइन त्रैमासिक पत्रिका में प्रकाशित ग़ज़ल
सदीनामा दैनिक बुलेटिन में प्रकाशित ग़ज़ल
ग़ज़ल
ग़ज़ल - आशियाँ ये बदल रहा हूँ मैं
ग़ज़ल
ग़ज़ल -  आईना भी छिपा नहीं सकता
गणतंत्र दिवस की समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई- पढ़े ग़ज़ल : साथ मिल जुल के यार हमकों रहना है
ग़ज़ल - तेरी ही लगन अब लगी है फ़क़त
नए साल में वायरल रचना जां से प्यारे यार बदलते देखें है - आकिब जावेद
ग़ज़ल आईने पे धूल भारी हो गई है।gazal aaine pe dhul bhari ho gyi hey ।akib javed
ग़रीबो की मिलके सभी ले दुआएँ।
दुआ माँ की लेकर यूं बढ़ते रहेगें
ग़ज़ल -हमने सिक्के उछाल रख्खे हैं
कलम से नसीहत लिखेंगे
ग़ज़ल- हाज़रो दर्दों ग़म के दरम्यां हम थे
ग़ज़ल - कभी ग़म का समंदर देख लेना
ग़ज़ल- आइने सी तिरी जवानी भी