कविता
शहर की उबाऊ भीड़
और ये कंक्रीट के वन
एसी और कूलर के पेड़
जान लेने पर आ गए है।
मौसम वैज्ञानिकों ने
तापमान का कर लिया है आकलन
कह दिया है सभी से
एसी और कूलर के पेड़ो को काट कर
हरे - भरे वृक्ष का रोपण हों
जिससे मिल सके राहत।
जैसे मिलती है राहत
मिट्टी के घर में,
साल,नीम,पीपल,बरगद के वृक्षों के नीचे।
भौतिकता की अंधी आंधी ने
अंधा कर दिया है मानव को और
भूल गया है मानवता को मानव।
आकिब जावेद
स्वरचित/मौलिक
3 टिप्पणियाँ
बहुत बहुत आभार आपका आदरणीया जी
जवाब देंहटाएंसुन्दर
जवाब देंहटाएंसुन्दर
जवाब देंहटाएंआपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
आपका साथ ही साहित्यिक यात्रा को और सुंदर बनाता है।
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