वेलेंटाइन वीक पर प्रेम की कविता - मृगतृष्णा "अधरों की मिठास"

कविता - मृगतृष्णा "अधरों की मिठास"

तुम्हारे अधरों की
मिठास
तृप्त कर जाती है
जीवन की हर प्यास,
मृगतृष्णा-सा मन
भटकता रहता है
मरीचिका के उजास।

उद्वेलित होती हैं
भावनाएँ
प्रेम की खोज में,
लेकिन
नेत्र ठिठक जाते हैं
क्षण भर
तुम्हें निकट पाते ही।

चक्षु निर्जन वन-से
काँपते हुए,
हर पल डगमगाता मन,
पर प्रेम के
होने का यह एहसास
दे जाता जीवन को
नया लक्ष्य, नया पथ।

आकिब जावेद
बांदा, उत्तर प्रदेश,भारत

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6 टिप्पणियाँ

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