२८.०५.२३
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पकड़ तिरंगा हाथ में ,बेटी है मजबूर
लोकतंत्र अभी कितना,संसद से है दूर
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आकिब जावेद
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२८.०५.२३
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पकड़ तिरंगा हाथ में ,बेटी है मजबूर
लोकतंत्र अभी कितना,संसद से है दूर
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आकिब जावेद
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"सपने वो नहीं जो नींद में देंखें,सपने वो हैं जो आपको नींद न आने दें - ए० पी०जे०अब्दुल कलाम "
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