#ख्वाबों_के_दरम्यां
कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
दुष्यंत कुमार
आप सभी को किताब पसंद आ रही है,बहुत शुक्रिया सभी का🌹🌹💐
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