आज का शेर

मत रखो भेद अपने दिलों में यहाँ
भाई-चारे को अपने यूं मिटने न दो

-आकिब जावेद

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2 टिप्पणियाँ

  1. आप बिना घुमाए बता देते हैं कि असली लड़ाई बाहर नहीं, हमारे दिलों के भीतर चलती है। भेद हम खुद पालते हैं और फिर भाईचारे के टूटने पर हैरान होते हैं। आपकी बात उपदेश नहीं लगती, बल्कि दोस्त की सधी हुई सलाह जैसी लगती है। आज के समय में, जब छोटी-छोटी बातों पर दीवारें खड़ी हो जाती हैं, यह संदेश और भी ज़रूरी बन जाता है।

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