आज का शेर

मुहब्बत है वतन से जिसे हम माँ कहते है
इसी मिट्टी को हम सब हिंदोस्ताँ कहते है

-आकिब जावेद

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1 टिप्पणियाँ

  1. आपने वतन के लिए जो प्यार लिखा है, वह सीधा दिल तक पहुँचता है। आपने देश को माँ कहकर एक गहरा रिश्ता जोड़ दिया। हम सच में इसी मिट्टी में खेलते हैं, इसी में सपने बोते हैं और इसी से पहचान पाते हैं।

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