कुछ आरज़ू छुपाये,हम मुस्कुराये एक दिन
जिंदगी को बेवफ़ा बनाये,इतराये एक दिन
वो फूलो की डलिया,महकता गुलाब
महकनी चाहिये हमारी भी जिंदगी एक दिन
होते है कटु,चुभते है सीधे दिल के अंदर
जुबां भी अपनी सुनाती है कहानी एक दिन
वो ऊँची पहाड़ी,सूंदर नज़ारा,नदी का किनारा
याद करके उन पलों को भूलती उदासी एक दिन
सबो रंज गम को आकिब'भूल जाओ अब तुम
ज़िन्दगी भी अपनी सुनाएगी कहानी एक दिन।।
-आकिब जावेद
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