स्मृति न अतीत है,
न भविष्य की छाया
वह तो चेतना का
एक ठहराव मात्र है।
जो बीत गया,
वह गया नहीं;
जो आने वाला है,
वह नया नहीं।
जीवन न चलता है,
न रुकता है-
वह केवल
घटित होता है।
याद और भूल
दोनों ही साधन हैं,
अहं को गलाने के,
अनुभव को पकाने के।
कर्म बीज है,
स्मृति उसका अंकुर-
और जीवन
उसका मौन फल।
जो समझ गया,
वह मुक्त हुआ;
जो उलझा स्मृतियों में,
वह पुनः जन्मा।
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