आज की शाइरी हग डे पे - बाहों में

तेरे मिलने से पहले कुछ नही था
तेरे मिलने से बेहतर हो गया हूँ।

तुम्हारे हिज़्र का ग़म कैसे मैं भूलूँ
कि दिल मे ज़ब्त नश्तर हो गया हूँ।

लिया था  सर्द रातों  ने  जो बाहों में
तेरे बोसे की गर्मी पे निछावर हो गया हूँ।

आकिब जावेद

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5 टिप्पणियाँ

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (१३-०२ -२०२२ ) को
    'देखो! प्रेम मरा नहीं है'(चर्चा अंक-४३४०)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  2. बाबा वेलेंटाइन द्वारा प्रतिपादित वैलेंटाइन सप्ताह, के हग डे पर आपकी गजल के हर शेर काबिले तारीफ हैं। साधुवाद!--ब्रजेंद्रनाथ

    जवाब देंहटाएं

आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
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