तेरे मिलने से पहले कुछ नही था
तेरे मिलने से बेहतर हो गया हूँ।

तुम्हारे हिज़्र का ग़म कैसे मैं भूलूँ
कि दिल मे ज़ब्त नश्तर हो गया हूँ।

लिया था  सर्द रातों  ने  जो बाहों में
तेरे बोसे की गर्मी पे निछावर हो गया हूँ।

आकिब जावेद