2122 1212 22
देश का नाम हमको करना है
साथ मिल जुलके यार रहना है।
है मुहब्बत हमें वतन से अगर
सब रहे मिलके ये ही सपना है।
राहबर देश के मुलाज़िम हैं
क्यूँ भला उनसे हमको डरना है।
कैसा दुश्मन हो हम नही डरते
इस ज़माने से ये ही कहना है।
ज़ान दे देंगे हम तिरंगे पर
अब हमें एक बनके रहना है।।
बस मुहब्बत ही हो ज़माने में
नफ़रतें अब जरा न सहना है।
धर्म-जाति के नाम पर 'आकिब'।
इस सियासत से अब न डरना है।।
✍️आकिब जावेद
4 टिप्पणियाँ
बहुत बढ़िया लिखा है आपने आकिब भाई🌹❤️
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया अजय भाई
हटाएंBahut khoob
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया
हटाएंआपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
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