उन्हें किस तरह से दिखाऊँ मैं वो जो कहते हैं कि खुदा नही।।ग़ज़ल

मेरे दिल का हाल,यूँ तेरे दिल के हाल से जुदा नही
उन्हें किस तरह से दिखाऊँ मैं वो जो कहते हैं कि खुदा नही

आँखों ही आँखों में कर ली सारी बाते दिल को पता नही
उन्हें क्या पता था कि उनकी आँखों में अब वो नशा नही

महफ़िल में हमको कभी वो इस तरह मिला नही
दिल दुःखाता रहा हमारा मगर कोई हमको गिला नही

वो कल रात ख्वाबो में आये निगाहे कमाल थी
उनकी अदा देख अब कैसे ना कहे कि वो खुदा नही

तेरा ही ख्याल यूँ हाल मेरे बेहाल वो मुझे जला रहा
सुनसान दिल में वो रहते है ऐसे फिर भी वो छिपा नही

मेरी सदाओं का अब तुझको पता नही
ऐसा कोई समय नही,जिसमे दिल टूटा नही

गुलो को गुल की फ़िकर रही,दिल में एक चुभन रही
उन्हें किस तरह से दिखाऊँ मैं वो जो कहते है कि खुदा नही

दौरे जमाने में किससे कुछ कहे
कुछ अपना नही,गैरो का पता नही

दिल ज़ोयी करने को बैठे हैं सब यहाँ
किसी के कुछ मज़ा नही,किसी के यहाँ हया नही

बहुत खोज़ खबर की उसके दिल का कुछ भी पता नही
उन्हें किस तरह से दिखाऊँ मैं वो जो कहते हैं कि खुदा नही

ना उम्मीदों का कारवाँ, ना ही है दिलो में खिर्ज़िया
अब किस तरह उन्हें बताये की अभी दिल मेरा भरा नही

मेरा हमसाया भी मेरा नही,तग़ाफ़ुल नही ज़माने में
उन्हें किस तरह से दिखाऊँ मैं वो जो कहते हैं कि खुदा नही।।

-आकिब जावेद

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