है ख्वाईश जानी पहचानी मेरी
ज़िन्दगी सुनाती है कहानी मेरी।।
चंद लम्हात के सहारे है सब
क्यू मौत है अब दिवानी मेरी।।
ख़ामोश लब सब पहचानते हैं
यूँ लफ्ज़ लफ्ज़ है ज़ुबानी मेरी।।
सब ऋतुओं है गेसुओँ में तेरे
ज़िन्दगी भी है यूँ दिवानी मेरी।।
इश्क की फसल बोया यूँ हमने
फिर ग़ज़ल हो गई धानी मेरी।।
दास्ताँ सुनाई यूँ आलम ने आकिब"
चाँद तारो ने बँया की कहानी मेरी।।
-आकिब जावेद
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