साहित्य के सोपान परिवार के प्रथम वर्षगाँठ पर कुछ अशआर

महफ़िल की सब शान है
आने से आती मुस्कान है

दिलो में सब छा जाते है
ऐसा प्यारा ये सोपान है

सब की यहाँ अहमियत
फिलबदीह अब आन है

करते सभी यहाँ शायरी
निकलते अब अरमान है

गुणी विद्बानो की संगत है
नाचीज़ भी अब मेहमान है

ऐसा प्यारा ये परिवार है
जिसका नाम सोपान है।।

आकिब जावेद

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