ख़ुद्दार हूँ,ये इनायत नई नई है
महबूब है, मुहबबत नई नई है
घायल दिल रहा यूँ मेरा
प्यार की राहत नई नई है
महकने लगा फ़िज़ा भी
गुलो की रंगत नई नई है
वो संगदिल रहे ज़माने में
फ़ितरत उनकी नई नई है
ये सदाकत हुश्न की बनी रहे
बेवफ़ा की फितरत नई नई है
लफ्ज़ लफ्ज़ सब बंया तू है
सुनो अब आयत नई नई है
दबी दबी सी तेरी मुस्कुराहट
बता रही मुहब्बत नई नई है
मुझे सताने की थी उनकी साज़िश
"आकिब"उनकी शरारत नई नई है
-आकिब जावेद
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