सच को छुपाते,हकीकत नई नई है
भ्रम में है वो, ये करामत नई नई है
बुनियाद अपनी भी मज़बूत हो
लेकिन अभी इबादत नई नई है
वो नही मानता कानून को
उनकी सियासत नई नई है
वो नही मानते रिवायत को
उनकी बग़ावत नई नई है
दौलत के ख़ुमार में डूबे हुए है
अभी उनकी दौलत नई नई है
गुरूर जो दिल में बस गया
उनकी अब ये लत नई नई है।।
-आकिब जावेद
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