सनम की आँखों में आँसू आता देखा
दिल की धड़कन को धड़कता देखा
मुश्किल थी तड़प,ये कसक उनकी
यूँ विरह की पीड़ा से तड़पता देखा
यूँ उनकी घनी ज़ुल्फो में ही हो शाम
बाँहो में अक्सर उनके आसरा देखा
कोई ज़ुर्म तो नही यहाँ इश्क करना
लोगो को अक्सर बनते खुदा देखा
उम्र की दहलीज़ में पहुँचते ही वो
ज़िन्दगी की चादर को गिरा देखा
जो कल तक थे सदियों से बावफ़ा
पल भर में गैर के लिए बेवफ़ा देखा
-आकिब जावेद
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