एक असर था दीदार में उनके,पता है
मैं आँख मूँदता हूँ,वो सामने आता है
खुद को जादूगर समझा,जादू किया
वो मुझे तोड़ता हैं, खुद भी टूटता है
सब्र की इंतिहा रही कुछ इस तरह
दिल भी टूटता हैं,प्यार भी करता है
अनबूझ पहेली को अब सुझाये कैसे
खुदा मेरा दिल अब यूँ क्यू तोड़ता है
वो ऐसे ही हैं"आकिब"छेड़ते हैं तुमको
उनका दिल कुछ,दिमाग कुछ बोलता है
©आकिब जावेद
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