आज की शायरी

भले ही तल्ख़ रिश्ते हो गए हैं,
ज़ुबाँ पे रहता है किस्सा हमारा।

मुहब्बत मुल्क़ से करतें सभी हैं,
मिला है खून का हिस्सा हमारा।

بھلے ہی تلخ رشتے ہو گئے ہیں،
زباں پہ رہتا ہے قصہ ہمارا۔

محبت ملک سے کرتے سبھی ہیں،
ملا ہے خون کا حصہ ہمارا۔

डॉ.आकिब जावेद

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ