तेरी मेरी यही कहानी है,
ज़िन्दगी हर बशर की फ़ानी है।
تیری میری یہی کہانی ہے،
زندگی ہر بشر کی فانی ہے۔
दौर अच्छा गुज़र गया आख़िर,
अब तो बस दर्द की कहानी है।
دور اچھا گزر گیا آخر،
اب تو بس درد کی کہانی ہے۔
वो तो नज़रों से क़त्ल करतें हैं,
उनकी ये भी अदा पुरानी है।
وہ تو نظروں سے قتل کرتے ہیں،
اُن کی یہ بھی ادا پرانی ہے۔
बेवजह आप क्यों बहाते हो,
आंख में अश्क़ है कि पानी है।
بےوجہ آپ کیوں بہاتے ہو،
آنکھ میں اشک ہے کہ پانی ہے۔
आह होठों पे ज़िस्म है घायल,
ये तिरे प्यार की निशानी है।
آہ ہونٹوں پہ جسم ہے زخمی،
یہ ترے پیار کی نشانی ہے۔
तेरे होठों पे नाम है मेरा,
यूँ लगे जैसे हक़ बयानी है।
تیرے ہونٹوں پہ نام ہے میرا،
یوں لگے جیسے حق بیانی ہے۔
मैं तेरे पास यूँ नहीं बैठा,
इक कहानी अभी सुनानी है
میں ترے پاس یوں نہیں بیٹھا،
اک کہانی ابھی سنانی ہے۔
- आकिब जावेद
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