रोचक रचनाओं का गुलदस्ता है "हाथी को भी चित कर देती" बाल कविता संग्रह
उर्वर भूमि में यदि बीज का रोपण कर दिया जाए तो वह शीघ्र ही उपयुक्त परिस्थिति पाकर अंकुरित और पल्लवित हो जाता है। यह अंकुर ही उसको बीज से वृक्ष बनाकर एक दिन पर्यावरण के अंग के रूप में स्थापित कर देता है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सारा समाज उससे लाभान्वित होता है। ठीक इसी प्रकार बालमन की कच्ची और उर्वर भूमि में हम जिस प्रकार के संस्कार रोपित करते हैं, यह भविष्य में वैसा ही परिणाम हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं। ज्ञान और संस्कार हमें घर -परिवार और समाज के साथ-साथ साहित्य से भी प्राप्त होते हैं। यदि बच्चों को बचपन से ही साहित्य से जोड़ा जाए, उनमें साहित्य को पढ़ने की अभिरुचि उत्पन्न की जाए तो इसके परिणाम अत्यंत लाभदायक होंगे।
इसके लिए बच्चों को साहित्य से जोड़ना ही जरूरी नहीं , बल्कि अच्छा साहित्य उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
बाल साहित्य में बाल कहानियां, पहेलियां ,कविताएं ,नाटक एकांकी इत्यादि जो भी विधाएं हैं ,उनमें सबसे प्रसिद्ध विधा है- बाल कविता। जिनको बच्चे रुचि लेकर पढ़ते ही नहीं बल्कि उसे अपने जीवन में उतारने भी हैं। इसलिए कविताएं जितनी सहज, सरल और छन्दबद्ध होगीं, उतनी ही रोचक हो जाती हैं। शिक्षा में भी खेल की अवधारणा परिपुष्ट हो चुकी है ।खेल-खेल में सीखना और सीखना शिक्षा का अनिवार्य अंग हो गया है। निश्चित वय वर्ग के बच्चों के लिए कविता इसके लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है। ऐसी ही रोचक सरस बाल मनोविज्ञान के अनुरूप शिक्षाप्रद तथा प्रेरणादायक कविताओं का गुलदस्ता है । *"हाथी को भी चित कर देती"* बाल कविता संग्रह। बाल कवि और साहित्यकार आकिब जावेद साहब कि यह बाल कविताओं की पुस्तक निश्चित रूप से प्रशंसनीय है। शिक्षक होने के नाते वह बाल मनोविज्ञान से भली- भांतिऔर अपने अनुभवों को उन्होंने इन बाल कविताओं रूपी माला में बड़ी खूबसूरती से पिरोया है। एक कविता दृष्टव्य है- जिसमें वह जंगल और पेड़ पौधों को बचाने का संदेश देते हैं । कविता का शीर्षक है-जंगल जीवन हमको देते-
*शेर हिरण सब रहते साथ/कुदरत की देखो सौगात/जंगल को हम सभी बचाएं/इनसे ढेर -सी चीजें पाएं।*
लालच का फल नामक कविता में बड़े प्रभावशाली तरीके से बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाते नजर आते हैं। कुछ पंक्तियां देखें-
*फिर पापा जी पिंजरा लाये/रोटी फल उसमें लटकाए/पकड़ी चुहिया मजा भी आया/लालच का फल उसे चखाया/*
कविताएं केवल उपदेशात्मक हो तो बच्चों की रुचि कम हो जाती है। इसलिए कविताओं की रोचकता को कायम रखते हुए हमें उन्हें शिक्षा भी प्रदान करनी है। जिसमें कवि आकिब साहब पूरे कामयाब होते नजर आते हैं। प्रजातंत्र की चिड़िया कविता अलग ही प्रकार की कविता है-इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुछ कहने की कोशिश की गई है। प्रजातंत्र में एकता की शक्ति का एहसास कराया गया है-देखें
*जंगल में था जंगल राज/पहन रखा था शेर ने ताज/सभी जानवर रहते डरकर/ जीना हो गया उनका दूभर/*
"साइंस का प्रदर्शन जादू "इस कविता में कवि ने बहुत अच्छी प्रकार से बच्चों को जादू, भ्रम और साइंस मैं अंतर स्पष्ट किया है-
जादू वाला जादू करता /देख देख के बंटी डरता/
भ्रम पैदा करके जादू करते/दर्शन जिसको देखकर डरते/मनोरंजन का है साधन जादू/साइंस का प्रदर्शन जादू
मेहनत हमें सिखाती मकड़ी, इस कविता के माध्यम से कवि बच्चों को परिश्रम का पाठ पढ़ाने में सफल होता है ,देखें-
मेहनत हमें सिखाती मकड़ी
/संघर्ष ही जीवन बताती मकड़ी।
इसी प्रकार विभिन्न विषयों पर आकिब साहब ने अपनी कलम चलाई है और बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी से वह कविता के विचार निकाल कर लाए हैं। एक ऐसी जिंदगी ,जिसको बच्चा जीता है जो अपने चारों तरफ परिवेश में देखता है और जिससे वह प्रभावित होता है। हर परिस्थिति, हर वस्तु, हर समस्या ,हमें कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ शिक्षा अवश्य दे रही है ।बस चाहिए तो वैसी आंख। और वह आंख उपलब्ध कराता है एक संवेदनशील कवि। संग्रह की सभी कविताएं अच्छी हैं। इसमें अन्य कविताएं हैं। पौधों का महत्व, सबकी प्यास बुझाता पानी, ध्रुव तारा उत्तर दिशा, मेरी पेंसिल बहुत निराली, कहीं-कहीं कुछ कविताओं में हास्य का पुट भी देखने को मिलता है जहां अनायास ही पढ़ते हुए होठों पर मुस्कुराहट खेल जाती है। जैसे बंदर बैठा रेल में, मच्छर को चढ़ गया जुनून, टैक्सी लेकर आया भालू आदि।
पुस्तक की शीर्षक कविता हाथी को चित कर देती। बहुत सुंदर और प्रभावी कविता है। पुस्तक का यह शीर्षक और पुस्तक का आवरण बच्चों को आकर्षित करता है। अच्छा होता इस कविता को पुस्तक के अंत में स्थान न देकर प्रारंभ या मध्य में कहीं स्थान दिया जाता । अंत में संपर्क प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रस्तुत बाल कविता संग्रह अपने लक्ष्य को प्राप्त करती नजर आती है। उम्मीद है आगे भी आकिब साहब की उत्कृष्ट रचनाएं और उत्कृष्ट संग्रह हमें मिलते रहेंगे। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ।
डॉ० संदीप कुमार सचेत
संभल, उत्तर प्रदेश
मोबाइल --9720 66 8282
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