जंगल की आग कहानी पर चित्रकला कार्यशाला
विद्यालय में जंगल की आग कहानी पर आधारित चित्रकला कार्यशाला आयोजित की गई। बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कहानी के विभिन्न दृश्यों के सुंदर चित्र बनाए।
इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण और जंगलों को आग से बचाने का संदेश रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। सभी बच्चों की सहभागिता सराहनीय रही।
प्रस्तुत कहानी ---
एक बार एक जंगल में आग लग गई। सभी जानवर आग बुझाने में जुट गए। जिसके हाथ में जो भी पात्र आया वह उसमें पानी भर कर आग में डालने लगा। सभी को आग बुझाने जुटा देख, एक नन्ही गौरैया भी अपनी चोंच में पानी भर-भर कर आग में डालने लगी।
एक कौवा दूर सुरक्षित डाल पर बैठा तमाशा देख रहा था। वह गौरैया के पास आकर बोला- "नन्हीं गौरैया ! क्यों बेकार मेहनत कर रही हो ? तुम्हारी नन्हीं चोंच का बूँद भर पानी इस भयंकर आग को बुझाने में क्या सहायता कर पाएगा?"
गौरैया बोली - यह तो मैं भी जानती हूँ, परंतु यदि कभी इस आग के बारे में बातें होंगी, तो मेरा नाम आग लगाने वालों अथवा तमाशा देखने वालों में नहीं, बल्कि आग बुझाने वालों में लिया जाएगा।
आकिब जावेद
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