कविता मित्र

मित्र,
हृदय में हर्ष उमंग भर दे,
समस्त द्वंद्व हर लेता है।
अतृप्त लोचन तृप्त कर दे,
नित नूतन आनंद देता है।

डॉ.आकिब जावेद 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ