दोहा
साँप से भी ज़हरीला,मनुष्य हो गया आज।
विषधर बैठे सोचता , दे दूँ अपना ताज।
"सपने वो नहीं जो नींद में देंखें,सपने वो हैं जो आपको नींद न आने दें - ए० पी०जे०अब्दुल कलाम "
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