तमाम अहले हिंदुस्तान को ईद की बहुत मुबारकबाद 🌙♥️
ईद पे लिखे अपने कुछ शे' र पेश कर रहा हूँ 👇👇♥️
ईद की ये रौनकें है सब्र भी,
साथ में ईमान की दौलत भी है।
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दर्द मेरा हरा था कहीँ ईद थी,
देखते है यहाँ चाँद सब ईद में।
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ईद आई तुम न आए क्या मज़ा है ईद का,
ईद ही तो नाम है इक दूसरे की दीद का।
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खुशियाँ सबसे बाटों, मुस्कान फैलाओ,
आपस में सभी मिलकर ईद मनाओ।
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अपनी ख़ुशी कैसे मनाऊँ मैं यहाँ,
दर-दर भटक कर ईद थोड़ी होती है।
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ईद कैसे मनाए.....वबा के दौर में,
मुल्क़ में इम्तिहाँ ले रहा है यूं ख़ुदा।
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कैसे ईद मनाए भला दौरे वबा में,
अच्छा है कि ईमा रखें हम सिर्फ ख़ुदा में।
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दर्द मेरा हरा था कहीँ ईद थी,
देखते है यहाँ चाँद सब ईद में।
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आइए मिलकर खुशियाँ फैलाए
हम सब अमन चैन से ईद मनाए
✍️ आकिब जावेद
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