कुछ हम हमारी कुछ अदावत खा गई हमें
ज़ीस्त से जारी ये बग़ावत खा गई हमें
हम ही निभातें फिर रहे रिश्तों की डोरी को
झूठों की दुन्या में जलावत खा गई हमें।
आकिब जावेद
अदावत - दुश्मनी, वैर, शत्रुता, द्वेष
जलावत - उज्ज्वलता, प्रकाश, रौशनी, स्वच्छता, धवलता, सफ़ाई।।
बग़ावत- बाग़ी होना, किसी के खिलाफ़ खड़ा होना, विद्रोह, अवज्ञा, नाफ़रमानी, ग़द्दारी
0 टिप्पणियाँ
आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
आपका साथ ही साहित्यिक यात्रा को और सुंदर बनाता है।
इसी तरह अपना प्रेम और मार्गदर्शन बनाए रखें। 🌹