सिर्फ़ एक दिन नही, हर दिन महिला दिवस हो

सिर्फ एक दिन नहीं, हर दिन महिला दिवस हो

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का असली अर्थ तभी है, जब दुनिया की हर महिला को सम्मान, सुरक्षा और गरिमा के साथ जीने का अधिकार मिले।

लेकिन जब हम बेटियों के साथ हुए क्रूर अत्याचारों की खबरें पढ़ते हैं, जब युद्ध की आग में मासूम बच्चियों और महिलाओं की ज़िंदगियाँ खत्म होती देखी जाती हैं, जब कहीं माँ, बहन और बेटी की अस्मिता को दरिंदगी से कुचला जाता है, जब नाबालिग बच्चियों के साथ यौन शोषण की घटनाएँ सामने आती हैं -- तब यह सवाल उठता है कि क्या केवल एक दिन “महिला दिवस” मनाना पर्याप्त है?

सच तो यह है कि सम्मान किसी एक दिन का उत्सव नहीं होता।
सम्मान एक संस्कार है, एक दृष्टि है, एक सोच है।जिस दिन हमारी नज़रों में हर महिला के लिए सच्चा आदर होगा,जिस दिन हर बेटी खुद को सुरक्षित महसूस करेगी,जिस दिन किसी माँ, बहन या बेटी की गरिमा पर आंच नहीं आएगी। उसी दिन से साल का हर दिन वास्तव में महिला दिवस बन जाएगा।

आइए, आज केवल शुभकामनाएँ न दें, बल्कि यह संकल्प लें कि हम अपने विचारों, व्यवहार और समाज में नारी के सम्मान को सर्वोच्च स्थान देंगे।

क्योंकि जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं समाज सच में सभ्य कहलाता है।

डॉ. आकिब जावेद

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