शोषित - वंचितो को पढ़ने का
अधिकार दिलाया।
राजनीतिक - सामाजिक
गलियारों में तूती बुलवाया।
संविधान बना कर सबको,
जीने की राह दिखलाया।
छुआ - छूत से मुक्ति दिलाई,
अधियारें में रौशनी फैलाई।
क्या ये सब किया
बेकार चला गया?
गुलामी की बेड़ी
जेहन में अभी तक पड़ी है,
तुम्हारे हक़ के लिए
किया गया संघर्ष
क्या मज़ाक बन गया?
आकिब जावेद
0 टिप्पणियाँ
आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
आपका साथ ही साहित्यिक यात्रा को और सुंदर बनाता है।
इसी तरह अपना प्रेम और मार्गदर्शन बनाए रखें। 🌹