जंगल में है
लोकतंत्र का त्यौहार
सारे पक्षी
चुनने को राजा तैयार।
मोर, सारस,गौरैया,
कौआ, गिद्ध,बाज
साथ में तीतर।
सब लोकतंत्र में
अपना खम ठोक रहे।
सभा लगा कर
एक -दूसरे को खूब
आकर्षित कर रहे।
किसी ईमानदार,निष्ठावान
को चुनने से कतरा रहे।
अपनी -अपनी जात में
सब खूबी ढूंढ रहे।
कैसे लोकतंत्र
स्थापित हो पाएगा?
सारे पक्षी जात में बंट जायेगे।
खुली हवा ,ये खुला आसमान,
नदियां,पहाड़,पेड़, पौधें सभी
भेद नहीं रखते किसी में।
अंतः जात वाले का पक्षी ही
चुना जायेगा।
वो ही राजा कहलाएगा।
जंगल के लोकतंत्र का
वो उपहास उड़ाएगा।
आकिब जावेद
बांदा,उत्तर प्रदेश
0 टिप्पणियाँ
आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
आपका साथ ही साहित्यिक यात्रा को और सुंदर बनाता है।
इसी तरह अपना प्रेम और मार्गदर्शन बनाए रखें। 🌹