हम  यहाँ  दैर - ओ - हरम  में   नही  दिल  में  रहें
सबके  दिल   मे   हो  यहां  रार  ज़ुरूरी  तो  नहीं।

सर - फिरे  लोग  ही  करते  है यहां  खून  ख़राबा
सब  हों   उल्फ़त  में  गिरफ्तार  ज़ुरूरी  तो  नहीं।

✍️आकिब जावेद

दैर-ओ-हरम = का'बा और मुर्तीगृह, मंदिर-ओ-का'बा,मंदिर और मस्जिद