धीमी - धीमी  आंच  में  पकती  है  जब  चाय,
नेह  भी  हो  जाए  तृप्त  अंतर्मन  बोले  हाय!
साथी - संगती  साथ  में  बैठें  लगाए चौपाल,
सुख - दुःख  बांटे साथ  में  हो बिस्कुट-चाय।

-आकिब जावेद