इस चमन में ख़ुश्बू महक जाने दो
अब मुझे मम्मी तुम स्कूल जाने दो।।
पढ़ के मै भी मम्मी नाम करूँगा
मुझको भी पढ़ के सँवर जाने दो।।
हर बुराई मिटती है पढ़ने से अब
मुझे शिक्षा का ऐसे दीप जलाने दो।।
मिलती सबको सुविधाएं भी खूब
मुफ़्त में ही लाभ ये मुझको पाने दो।।
ज़िन्दगी में खुशियाँ तुझको भी दूँ
देश के लिए मुझे कुछ बन जाने दो।।
बनता है कोई हिन्दू-मुश्लिम बनता है
मुझको तुम इंसान ही बन जाने दो।।
मै भी पढ़ लिख कर तरक्की करूँगा
मुझको इस साल से स्कूल जाने दो।।
-आकिब जावेद
6 टिप्पणियाँ
जी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार(०८-०४ -२०२२ ) को
''उसकी हँसी(चर्चा अंक-४३९४) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
हटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया आपका
हटाएंबहुत सुंदर संदेश
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया आपका
हटाएंआपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
आपका साथ ही साहित्यिक यात्रा को और सुंदर बनाता है।
इसी तरह अपना प्रेम और मार्गदर्शन बनाए रखें। 🌹