मुफ़लिसों को दुनिया में क्या कोई अधिकार नही
पास है हिम्मत की ताकत समझो तुम लाचार नही।।
लोग गरीबी की अक्सर खूब खिल्ली उड़ाते हैं
इंसान नही हैं ऐसों पर बोलो क्यों धिक्कार नहीं ।।
चारो तरफ घना अँधेरा नही रोशनी की गुंजाइश
हर हाथों में नफ़रत है प्यार कहीं दरकार नहीं ।।
जीवन में संघर्ष बहुत जिनसे लड़ना - मरना है
जीत गए तो जीत है अपनी हार गए तो हार नही।।
बैठे हैं बिकने की खातिर दुनियां के बाजारों में
लेकिन ईमां न बेचूंगा कहीं किसी बाजार नही।।
-आकिब जावेद
2 टिप्पणियाँ
👌वाह! बहुत बढ़िया सृजित गज़ल 👌
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया आपका
हटाएंआपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
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