दिन के बाद
रात उतरती है,
फिर भोर का जन्म भी
निश्चित होता है।
समय की चाल
कभी ठहरती नहीं,
हर मोड़ पर
रंग बदलती है।
सुख और संघर्ष
जीवन के दो छोर हैं,
जो जैसा स्वीकार करे,
वैसा ही निखरता है।
डॉ.आकिब जावेद
दिन के बाद
रात उतरती है,
फिर भोर का जन्म भी
निश्चित होता है।
समय की चाल
कभी ठहरती नहीं,
हर मोड़ पर
रंग बदलती है।
सुख और संघर्ष
जीवन के दो छोर हैं,
जो जैसा स्वीकार करे,
वैसा ही निखरता है।
डॉ.आकिब जावेद
"सपने वो नहीं जो नींद में देंखें,सपने वो हैं जो आपको नींद न आने दें - ए० पी०जे०अब्दुल कलाम "
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2 टिप्पणियाँ
सुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया आपका
हटाएंआपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
आपका साथ ही साहित्यिक यात्रा को और सुंदर बनाता है।
इसी तरह अपना प्रेम और मार्गदर्शन बनाए रखें। 🌹