आज की शायरी #shair

कहाँ कोई ख़ज़ाना चाहता हूँ,
ज़रा सा मुस्कुराना चाहता हूँ।

मुझे  मौजे  उछाले  जा रही है,
मैं कब से डूब जाना चाहता हूँ।

-अनाम

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
आपका साथ ही साहित्यिक यात्रा को और सुंदर बनाता है।
इसी तरह अपना प्रेम और मार्गदर्शन बनाए रखें। 🌹