विषय: नयापन
विधा-छंदमुक्त
*****************************
एकांत कोने में
गुमसुम सी कहीँ
छुपी हुई है
मेरे अंदर एक
तन्हाई
जो पुकारती है
मुझे सालो से
एवं देखती है
मेरे अंदर छुपे
वात्सल्य को
प्रेम को
जो उड़ेलना
चाहती है
किसी अपने पर
जो दे सके मन को
अपार सुकूँ एवं
एहसास दिला दे
उसे नयेपन का
जो खाली पड़े
मन में बार - बार
यक्ष प्रश्न दाग जाता है।।
-आकिब जावेद
बाँदा,उत्तर प्रदेश
0 टिप्पणियाँ
आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
आपका साथ ही साहित्यिक यात्रा को और सुंदर बनाता है।
इसी तरह अपना प्रेम और मार्गदर्शन बनाए रखें। 🌹