कविता : करोना का डर

हर तरफ हल्ला हो रख्खा है
अफरा तफरी का है माहौल
कोई अपनी जान बचा रहा है
किसी की नागरिकता पे हो रहे सवाल
बैंक में पैसे ही नही बचे
बहुत भागम भागम का है माहौल
दूर से देख कर ही कर रहे सलाम
कि हो रहे सारे ठप्प काम धाम
टेंसन में जीवन यापन कर रहे है
सब मिलने से अब क्यों डर रहे है

#akib

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2 टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 14 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. सुन्दर प्रस्तुति।
    कोरोना से बचाव जरूरी है।

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आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
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