ज़िन्दा मेरे वजूद की कहानी लगे मुझे
उनके बगैर जिंदगी भी बेमानी लगे मुझे।
उनकी मोहबतो के ही दम जीये मगर,
गम दीदा ख्वाइशों की जुबानी लगे मुझे ।
दिलकी तडप ने पहोचाया उस मकाम पर,
मिलने की ही उमीद पे रूहानी लगे मुझे।
मेरा नसीब खींचके वहीं लाया तेरी तरफ,
बिमारे जांबलब की ही निशानी लगे मुझे।
मासूम बने सहारे का युं हमें आसरा मिला,
हर तरहा से ही तेरी मेरी कहानी लगे मुझे ।
-आकिब जावेद
0 टिप्पणियाँ
आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
आपका साथ ही साहित्यिक यात्रा को और सुंदर बनाता है।
इसी तरह अपना प्रेम और मार्गदर्शन बनाए रखें। 🌹