मौन तेरा तुझे,क्या विचलित नही करता।।
उठ जाग,खड़ा हो,आगे को बढ़,रास्ता कठिन नही कोई यहाँ।।
काँटों का रास्ता हैं ज़रूर लेकिन
बन जा तू अर्जुन की तरह।।
आँख को अपनी निशाने में रख।।
फिर देख तेरा कौन रोकता हैं रास्ता।।
घर से निकल उस राह जहाँ भविष्य हैं तेरा।।
सुनहरा दौर,और तेरा भविष्य सब कर रहे है इंतज़ार तेरा।।
9 अगस्त बाँदा चलो।
जय शिक्षक,जय भारत
(आकिब जावेद, EMPS Umrehanda-Bisanda jila Banda)

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