ख्वाइशें तमाम जिंदगी की ऐसी बनी रही
पूरी करने की चाहत में हम सफर में ही रहे।
आरज़ू ए उन्वान हाये उल्फ़ते यह दिल
तमाम आरज़ू को हम ऐसे यूँही जगाये रहे।
कुछ पाने के खातिर कुछ छूट सा गया
कुछ पा कर भी हम सफर में ही रहे।
मसन्दे दुनिया फक्त रस्मो रिवाज के कुछ नही
अपनी भूख मिटाने को हम सफर में ही रहे।
खाली हाथ जिसके कुछ भी नही,होता हैं जो रंक
ये दुनिया दीवानी उसकी जिसके पास सब कुछ रहे।
किस्मत में अब हमको गुमाँ कुछ भी नही
मालूम हैं हमको,बाद मरने के सब खाली हाथ रहे।
जो होता हैं जैसे,वो वैसे दिखता नही
सब दिखावटी का मुखटा चेहरे पर लगाये रहे।
आकिब’दुनिया एक सफर हैं, अब यह तू जानले
अब जिंदगी के सफर में अकेला तू चलता रहे।।
-आकिब जावेद

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