हमेशा सोचता हूँ कि आखिर मैं क्यू सोचता हूँ
गर नही बदलेगा जमाना तो फिर ना बदलेगा समाज!
लेकिन बाद में सोंचते हुये फिर ये सोचता हूँ
गर आज हम ना बदले फिर तो ना बदलेगा समाज!
समाज में फ़ैली कुरूतियों के बारे में ये सोचता हूँ
गर भ्रूण हत्या,बलात्कार ना रुके तो ना बदलेगा समाज!
कैसे करेगे हम नये समाज का निर्माण यह सोचता हूँ
गर ना कोई करेगा संविधान का सम्मान तो ना बदलेगा समाज!
समाज की बुराइयों को ना कोई मिटायेगा तो क्या होगा
गर भ्रस्टाचार, जात, धर्म कि ही होगी राजनीति तो ना बदलेगा समाज!
अब ये सोचता हूँ कि सब रहे खुशहाल,न हो कोई गरीब
छोटा-बड़ा,जात-धर्म ना रहे कुछ समाज में,तो जरूर बदलेगा समाज।।
-आकिब जावेद

0 टिप्पणियाँ
Thanks For Visit My Blog.