गजल-होगी मुलाक़ात कब उनसे उस दुनिया में

होगी मुलाक़ात कब उनसे उस दुनिया में
जिस दुनिया में उसे मैं सिर्फ अपना पाऊँ

होगी मुलाकात कब उनसे उस दुनिया में
जँहा हर लम्हा तुम्हे तसव्वुर में अपना पाऊँ

होगी मुलाक़ात कब उनसे उस दुनिया में
जँहा बातो में तुम्हारी नाम सिर्फ अपना पाऊँ

महसूस हो रही अब हमको इक कमी तुम्हारी
मैं तेरी मांग सज़ा कर अब सिर्फ अपना बनाऊँ

होगी मुलाक़ात कब उनसे उस दुनिया में
जँहा प्यार से बना अपना आशियाना पाऊँ

होगी मुलाक़ात कब उनसे उस दुनिया में
जँहा तसव्वुर में सिर्फ अपना चेहरा पाऊँ

आकिब'मुलाक़ात करनी हैं अब उस दुनिया में उनसे
जिस दुनिया में हर लम्हा उन्हें सिर्फ अपना पाऊँ।।

-आकिब जावेद

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