आज खुश्क हवा बह रही हैं
कंही किसी को याद कर रही हैं!
कुछ ठंडक,बाते गरमा गरम आज
एक कप काफी के साथ याद कर रही हैं!
सुन नया नया साल आज आया हैं
सारी पुरानी बातें याद कर रही हैं!
वो कल रात जो पूनम की आयी थी
उसमे अब उसे चांदनी याद कर रही हैं!
वो पूनम का चाँद ऐसे ही इतराता हैं
युही अंधेरो को ऐसे ही छाँट जाता हैं!
वो सारी पुरानी बाते,जो कभी की थी तुमने
वह सारी बाते अब याद आ रही हैं!
वो प्यार से मचल जाना तेरा,फिर रूठ जाना
इस नए साल मयस्सर याद आ रही हैं!
ये दिन ये रात सब मौसम की तरह बदल जाते हैं
लेकिन इस नए साल कभी तुम मत बदल जाना!
हर एक बात चुभती हैं तेरी मुझे ए पूनम
ऐसा ये चांदनी अब चाँद से कह रही हैं!
इस नए साल मत भूल जाना मुझे ए पूनम
ऐसा चांदनी बार बार कह रही हैं।।
~Akib javed

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