क्या कसूर

जम्हूरियत में अपनी बात रखने का हक़
हमसे ऐसे क्यू छीनते हो

अब देख ये सितम आँख रोती है
हम पर इतना जुल्म ना ढा

आखिर क्या कसूर है हमारा
हम पर इतना जुल्म ना ढा

है तुम्हारा यह पूरा सिस्टम
हमने बताओ क्या गलत कहा

अपनी मांगों को रखने के खातिर
गांधी का अनुसरण किया

आखिर हुई क्या हमसे खता
हम पर इतना जुल्म ना ढा

हम इस देश की बच्चियां है
लगाओ सपनो में पंख हमारे

हम देश को रोशन करने आई है
आखिर हमसे हुई अब क्या खता

गांधी के अहिंसा के मार्ग को
हम करते है अनुकरण सदा

बता दो अब एक बात तुम
करते हो हम पर इतना जुल्म क्यू

जम्हूरियत में तो सबको बोलने का हक है
हम भी रखती है अपनी बात अब

आखिर क्या कसूर है हमारा
हम पर इतना जुल्म ना ढा।।

-आकिब जावेद

#BHU

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