मेरे लफ्जो लफ्जो में है नाम तेरा
तुम हरूफ हरूफ से बेगाने से रहे
हम जो होश में ना रहे
अपने भी बेगाने से हो गए
रफ्ता रफ्ता जिंदगी की डोर को
अब सम्भाले ना सम्भाल सके
बेसुध से हम हो गए
ख्यालो में यु खो गए
तुम जो हमसे बेगाने से हुए
हम तो तुम्हारे दीवाने से हो गए
जर्रा जर्रा हर्फ़ हर्फ़ सिर्फ तुमको ही पढ़ा है
तुम यह सब जान कर फिर भी बेगाने से रहे
मेरी दिल की डोर को,अपने हाथों में लेकर
कतरा कतरा मोड़ दो,हम फिर भी बेगाने से रहे
लाख दुनिया दिवानी तेरी
हम बेसुध बेगाने से रहे
परवाह नही ज़माने की,तुम अगर साथ हो
वरना भूल जाना मुझे,हम तो खबर से बेगाने ही रहे।।
-आकिब जावेद

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