वंहा सुखन मौजू ही कंहा
जँहा जँहा तेरी याद ना हो
या खुदा फक्त वक्त तेरे सिवा किसे याद करे
जर्रा जर्रा कतरा कतरा तेरा अक्श ही पाया है
मन मौजू में तू ही हासिल
तू ही साहिल पार लगाता है
जब भँवरों में मन फस जाता हैं
तू सामने हमेसा नज़र आता हैं
कैसे कह दूं तू है ही नही
तू ही मेरे मन में समाता है
माँ की ममता में तुझको देखा
बाप के प्यार में पाया जाता हैं
जर्रे जर्रे में मौजूद है तेरा साया
तू ही मन मंदिर में आता है
ए खुदा तू नज़र आता नही
लेकिन सब जगह पाया जाता हैं।।
-आकिब जावेद

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