जिंदगी का सफर

अंतर्मन से अपने कुछ ऐसी आवाज सुनो

जिंदगी के सफर में अब यु ही निकल पड़ो

किसी रोज किसी सफर में हम ऐसे निकल पड़े

वही भीड़ उतने ही लोग,हमे मिलते चलते गये

हर रोज हर लोग तमाम दुःख से मारे हुए

अनगिनत सवाल,अपने हाल में ऐसे ही छोड़े हुए

बिना कुछ सुने,बिना कुछ कहे मिलते चले गए

हमे हर रोज जिंदगी से एक नए सवाल मिलते चले गए

कोई फटे-हाल जिंदगी जीने को मजबूर सा हो गया

कोई जिंदगी के बेतरीन स्वाद चखते चला गया

किसी ने कुछ ना होते हुए भी,

जिंदगी से कोई सवाल ना किया

कोई खुदा की हर नेमत पाने के बावजूद,

हमेशा खुदा पर ही अनगिनत सवाल किया

कोई अपनी बदहाली पर खुश हो कर जिया

किसी ने ऐशो-आराम करते हुए भी परेशानियों में जिया

हर रोज हर सड़क पर एक नई सीख मिली

जिंदगी को जीने की हमे एक नई राह मिली

हासिल रहा ना कुछ भी, फिर भी हमे गुमान रहा

किसी के पास कुछ ना होते हुए भी, सब कुछ रहा

लबो पर किसी के अब एक हँसी उधार दो

किसी से दो चार बाते करके उसके गम उधार लो

जिंदगी को अपने अब राह पर चलते हुए सुधार लो

हर सफर में अब ऐसे ही,

कोई न कोई यु ही खुशियाँ उधार लो

आकिब'चलना है तुझको,ऐसे ही सफर में कोई

जिंदगी के सफर में हमेशा खुशियाँ बिखेर दो।।

-आकिब जावेद

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