बहुचर्चित लोकप्रिय ग़ज़ल संग्रह ख़्वाबों के दरम्यां से ग़ज़ल

प्रस्तुत है डॉ.आकिब जावेद के बहुचर्चित,लोकप्रिय ग़ज़ल संग्रह ख़्वाबों के दरम्यां से ग़ज़ल

नगर में आज हलचल सी मची है,
ख़बर अख़बार में क्या चल रही है।

सियासत ही सियासत है ये हर सू,
मुहब्ब्त को नज़र किसकी लगी है।

मुहब्ब्त है, वफ़ा है, आशिक़ी भी,
मिरे  दिल  में  कोई  दीवानगी है।

बहुत मसरूफ़ है ये ज़िन्दगी भी,
मगर फिर इक नई घटना घटी है।

सफ़र से  लौट  आया है मुसाफ़िर,
ज़माने  भर  में  ये  चर्चा  चली है।

मची  है  लूट  चारों  ही तरफ अब,
मियाँ  हर  सिम्त  होती रहज़नी है।

मुहब्ब्त  ही  मुहब्ब्त  हो  जहाँ में,
बनाई  रब  ने  जो  दुनिया भली है।

نگر میں آج ہلچل سی مچی ہے،
خبر اخبار میں کیا چل رہی ہے۔

سیاست ہی سیاست ہے یہ ہر سو،
محبت کو نظر کس کی لگی ہے۔

محبت ہے، وفا ہے، عاشقی بھی،
مرے دل میں کوئی دیوانگی ہے۔

بہت مصروف ہے یہ زندگی بھی،
مگر پھر اک نئی گھٹنا گھٹی ہے۔

سفر سے لوٹ آیا ہے مسافر،
زمانے بھر میں یہ چرچا چلی ہے۔

مچی ہے لوٹ چاروں ہی طرف اب،
میاں ہر سمت ہوتی رہزنی ہے۔

محبت ہی محبت ہو جہاں میں،
بنائی رب نے جو دنیا بھلی ہے۔

#ख़्वाबोंकेदरम्यां आकिब जावेद


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