1 - शे'र
मुहब्बत कभी तुम किए ही नही हो,
तभी जानते ही नही हो मुहब्बत।
محبت کبھی تم کئے ہی نہیں ہو
تبھی جانت ہی نہیں ہو محبت.
आकिब जावेद
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2- शे' र
मुहब्बत कभी तुमने की ही नहीं है
तभी तो मुहब्बत नहीं जानते हो।
आकिब जावेद
4 टिप्पणियाँ
Mohabbat kabhi tumne ki hi nahin hai,
जवाब देंहटाएंसर बहुत शुक्रिया आपका
हटाएंKiye to bahut hai.
जवाब देंहटाएंKitna
हटाएंआपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
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